एक खाली पड़ी मशीन अस्पताल के लिए एक साइलेंट किलर की तरह है

घंटे चलती रहें। एक खाली पड़ी मशीन अस्पताल के लिए एक साइलेंट किलर की तरह है। लेकिन एक सवाल उठता है। प्रिया बाहर की किसी सस्ती लैब से टेस्ट क्यों नहीं करवाती? वह बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा क्यों नहीं खरीदती, जहां शायद उसे डिस्काउंट मिल जाए? यहीं पर इस व्यवसाय का सबसे मजबूत इंजन काम करता है—कस्टमर साइकोलॉजी। स्वास्थ्य सेवा दुनिया का इकलौता ऐसा व्यवसाय है जहां ग्राहक अपनी मर्जी से नहीं आता। वह डर, चिंता और मजबूरी में आता है। जब किसी के पिता दर्द में हों, या परिवार का कोई सदस्य गंभीर हालत में हो, तो कोई भी मोलभाव नहीं करता। कोई यह नहीं पूछता कि "क्या इस ब्लड टेस्ट पर कोई डिस्काउंट मिलेगा?" लोग 'बेस्ट' चाहते हैं। वे सुविधा और सुरक्षा चाहते हैं। प्रीमियम अस्पताल इसी डर और विश्वास का फायदा उठाते हैं। वे आपको एक फाइव-स्टार होटल जैसी लॉबी, मुस्कुराते हुए स्टाफ और 'सब कुछ एक ही छत के नीचे' होने की सुविधा बेचते हैं। और ग्राहक खुशी-खुशी इस सुविधा की भारी कीमत चुकाता है। इसे याद रखिएगा। अस्पताल कभी सिर्फ इलाज नहीं बेचते, वे मन की शांति बेचते हैं। अब प्रिया की रिपोर्ट आती है और डॉक्टर बताता है कि उसके पिता को सर्जरी के लिए भर्ती होना पड़ेगा। जैसे ही मरीज अस्पताल में भर्ती होता है यानी आईपीडी (IPD) में जाता है, अस्पताल का बिजनेस मॉडल एक रिटेल दुकान से
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