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तो फिर हर ओनर के सामने एक बड़ा फैसला आता है। क्या वह किसी बड़े ब्रांड को मैनेजमेंट फीस दे, या खुद अपना स्वतंत्र होटल चलाए? अगर राहुल स्वतंत्र होटल चलाता है, तो वह ब्रांड की करोड़ों की फीस बचा लेगा। लेकिन फिर उसके पास कस्टमर्स कहाँ से आएंगे? आज के समय में, कस्टमर लॉयल्टी प्रोग्राम्स ही पूरा गेम चलाते हैं। जब कोई विदेशी पर्यटक या बड़ा कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव दिल्ली या मुंबई आता है, तो वह जोखिम नहीं लेना चाहता। वह एक जाने-पहचाने ब्रांड पर भरोसा करता है। वह ब्रांड का सेफ्टी, हाइजीन और स्टैंडर्ड
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