गाँव की गलियों में वीडियो बनाते। कभी खेत में शूट करते। कभी घर के बाहर। कभी दोस्तों के साथ। और फिर उन्हीं वीडियो को मोबाइल में बैठकर एडिट करते। लेकिन वीडियो बनाना जितना आसान था... लोगों तक पहुँचाना उतना ही मुश्किल था। कई बार दोनों पूरी मेहनत से वीडियो बनाते और उसे बहुत कम लोग देखते। कभी 20 व्यू आते। कभी 50। कभी 100। और कई बार तो ऐसा भी होता कि पूरी मेहनत के बाद वीडियो पर एक भी व्यू नहीं आता। रोहित कभी-कभी निराश होकर कहता— “भाई, शायद हमसे नहीं हो पाएगा।” लेकिन सोनू हमेशा उसका हौसला बढ़ाता। वह कहता— “आज नहीं हुआ तो कल होगा।” “कल नहीं हुआ तो परसों होगा।” “लेकिन हम कोशिश करना कभी नहीं छोड़ेंगे।” और दोनों फिर से वीडियो बनाने लगते। धीरे-धीरे दोनों भाइयों ने सोशल मीडिया के बारे में सीखना शुरू किया। समय बीतता गया। एक साल निकल गया। फिर दूसरा साल। लोग अब भी कभी-कभी कहते थे— “कितना समय बर्बाद कर रहे हो?” लेकिन सोनू और रोहित चुपचाप अपना काम करते रहे। उन्हें पता था कि पेड़ लगाने के बाद फल आने में समय लगता है। उसी तरह मेहनत करने के बाद सफलता मिलने में भी समय लगता है।धीरे-धीरे उनके वीडियो पर व्यू आने
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