महीने की पहली तारीख को उसके खाते में सैलरी आई

महीने की पहली तारीख को उसके खाते में सैलरी आई... उसने मोबाइल देखा और मुस्कुरा दिया। उसने सोचा... इस बार पैसे बचाऊंगा। लेकिन फिर EMI गई... घर का खर्च गया... कमरे का किराया गया... खाने का खर्च गया... और रास्ते में छोटे-छोटे खर्च होते रहे। उसे पता ही नहीं चला... कब महीने की 15 तारीख आ गई। अब खाते में पैसे कम थे। उसने खुद से कहा... "अगली सैलरी से पक्का बचाऊंगा।" फिर अगली सैलरी आई... और कहानी फिर वही। एक दिन उसने बैठकर अपने पिछले तीन महीनों का खर्च देखा। उसे एक बात समझ आई... उसकी समस्या कम सैलरी नहीं थी... उसकी समस्या थी कि उसे पता ही नहीं था कि पैसा जा कहाँ रहा है। उस दिन से उसने एक छोटा सा नियम बनाया। हर महीने सैलरी आते ही... सबसे पहले थोड़े पैसे बचाने लगा। फिर बाकी पैसे खर्च करने लगा। रकम छोटी थी... लेकिन कुछ महीनों बाद प
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