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कमलेश यह बात अपनी सास को बताने ही वाली होती है कि तभी उनकी नजर भीड़ में एक जानी-पहचानी शक्ल पर पड़ती है—वह पूजा ही होती है, जो जोश के साथ नारे लगा रही होती है। यह देखकर कमलेश हैरान और गुस्से से भर जाती है। वह तुरंत पूजा के पास जाती है और उसे घर ले जाकर सख्ती से पूछती है कि क्या वह खुद भी उसी समुदाय से जुड़ी है। पूजा शांत रहकर जवाब देती है कि वह ऐसी नहीं है, बल्कि वह सिर्फ उनके अधिकारों के समर्थन में खड़ी है। लेकिन यह सुनकर कमलेश और भड़क जाती है। वह उसे डांटते हुए कहती है कि एक बहू बनने वाली लड़की को इस तरह सड़कों पर प्रदर्शन करना शोभा नहीं देता और उसे तुरंत अपनी सास से माफी मांगनी चाहिए। लेकिन पूजा अपनी बात पर डटी रहती है। वह बेझिझक कमलेश को जवाब देती है कि हर किसी की सोच और जीवन का नजरिया अलग होता है, और किसी के हक के लिए आवाज उठाना गलत नहीं है। वह साफ कहती है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया, इसलिए वह माफी नहीं मांगेगी। पूजा के इस जवाब से कमलेश का अहं ठेस खा जाता है। गुस्से में वह पूजा की उंगली से सगाई की अंगूठी उतार लेती है और सबके सामने रिश्ता तोड़ देती है। वह साफ कह देती है कि अगर पूजा को इस घर का हिस्सा बनना है, तो उसे उनके नियमों के अनुसार चलना होगा।
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