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मुस्िलम बैल जमाल और िहंदू माँ मोिनका गौरव अपनी 39 वर्षीय माँ मोिनका और 52 वर्षीय िपता देबलाल के साथ एक अच्छे मोहल्ले के सुंदर घर में रहता था। गौरव 18 वर्ष का था और अभी भी व्यवसायी बनने की पढ़ाई कर रहा था। उसकी माँ गृिहणी थी और अपने पित और बेटे की देखभाल करती थी। उसके िपता िकसान थे और अपने पिरवार का भरण-पोषण करने के िलए खेतों में काम करते थे। देबलाल मोिनका जैसी सुंदर और वफादार मिहला पाकर खुद को भाग्यशाली मानते थे। मोिनका का शरीर सुडौल था और उनके स्तन सुडौल थे। उनकी नीली आँखें बड़ी थीं और सुनहरे बाल लंबे थे। देबलाल एक बलवान व्यक्ित थे िजनका कस्बे में सभी सम्मान करते थे। वे िदखने में भी सुंदर थे, हालाँिक उम्र के कारण उनमें कुछ कमज़ोिरयाँ और दर्द आने लगे थे। गौरव अपने माता-िपता से बहुत प्यार करता था और उन्हें हर िववािहत जोड़े के िलए आदर्श मानता था। उसे पूरा यकीन था िक उसके माता-िपता एक-दूसरे से प्यार करते हैं और वह हमेशा से चाहता था िक उसे भी अपनी माँ जैसी वफादार मिहला िमले। मोिनका का शादी से पहले या बाद में कभी भी अपने पित के अलावा िकसी और पुरुष से कोई संबंध नहीं रहा था। देबलाल गौरव का जीवन प्रेम था और िववाह के पहले िदन से ही वह उसके प्रित वफादार रही थी। गौरव और उसके माता-िपता िजस घर में रहते थे, उसके बगल में एक छोटा सा खाली मकान था जो लंबे समय से वीरान पड़ा था। जून के मध्य में एक गर्म िदन, गौरव ने उस खाली मकान के सामने एक कार को रुकते देखा। कार के पीछे एक छोटा ट्रक था िजसमें फर्नीचर और अन्य सामान लदा हुआ था। कोई बगल वाले घर में रहने जा रहा था। आिखरकार, पिरवार अब अकेला नहीं रहेगा। उनके पड़ोिसयों में एक और पिरवार होगा। लेिकन गौरव ने उस छोटी कार से केवल एक ही व्यक्ित
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