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शाम ढल रही थी और एक पुरानी बस बॉर्डर की ओर तेज़ी से बढ़ रही थी। किसी को नहीं पता था कि इस बस में बैठी एक दुल्हन अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फैसला लेकर जा रही है। बस की आख़िरी सीट पर बैठी दुल्हन पूरे रास्ते चुप थी। उसके हाथ में एक पुरानी चाबी थी, जिसे वह बार-बार कसकर पकड़ रही थी। सामने बैठे एक बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर पूछा, "बेटी, ससुराल जा रही हो?" दुल्हन ने धीमे से जवाब दिया, "नहीं... अपने घर जा रही हूँ।" यह सुनते ही बस में बैठे सभी लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद बस बॉर्डर पर रुकी। दुल्हन बिना एक पल रुके सामने दिखाई दे रहे पुराने घर की ओर दौड़ पड़ी। उसने काँपते हाथों से वही पुरानी चाबी ताले में लगा
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