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इतना कहकर वह बेरहमी से पूजा को कमरे से बाहर निकाल देता है। पूजा बिखरे हाल में, रोती हुई कमरे के बाहर खड़ी रह जाती है। वह चाहती तो घरवालों को सब कुछ बता सकती थी, लेकिन तभी उसे कमलेश और घर की बाकी औरतों की बातें सुनाई देती हैं। कमलेश कह रही होती है कि औरतें हादसों से कम, लेकिन घर में होने वाले तमाशे से ज्यादा डरती हैं। यह बात पूजा के दिल और दिमाग पर गहरा असर छोड़ जाती है, जैसे किसी ने उस पर जोर से चोट कर दी हो। उसे तुरंत समझ आ जाता है कि जिस माहौल और परिवार में वह है, वहां सच बोलने पर उसे इंसाफ नहीं मिलेगा—बल्कि उसी की इज्जत पर सवाल उठेंगे। इसी डर और बदनामी के खौफ में, जो लड़की कभी अपने हक के लिए आवाज उठाती थी, वही अब चुपचाप अपने आंसू दबाकर वापस उसी कमरे में लौट जाती है। उसके दिल में कहीं न कहीं यह उम्मीद बाकी थी कि शायद अरुण को अपनी हरकत का एहसास हुआ होगा और वह माफी मांगेगा। लेकिन कमरे में लौटने पर उसे बिल्कुल उल्टा देखने को मिलता है। अरुण माफी मांगने के बजाय उसका मजाक उड़ाता है और यह जताता है कि उसे पहले से पता था कि पूजा कुछ नहीं कर पाएगी। अपनी बात साबित करने के लिए वह एक बार फिर उसकी इच्छा के खिलाफ जाता है। पूजा पूरी तरह टूट चुकी होती है और सब कुछ सहते हुए बस चुप रह जाती है।
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