भारत के हर गांव में… एक कहानी छुपी होती है… लेकिन ये कहानी… शायद आपकी भी हो सकती है… ये कहानी है… रामपुरा गांव की… जहाँ आज भी… शाम होते ही… हर घर में दीया जलता है… गांव के किनारे… एक पुराना सा घर था… जहाँ रहते थे… बाबा रामदास… बाबा… हर रोज… घर के बाहर बैठते… और रास्ते की तरफ देखते रहते… जैसे… कोई आने वाला हो… उनका एक ही बेटा था… मोहन… जो शहर जाकर… बड़ा आदमी बन गया… शुरू में… वो हर महीने आता था… लेकिन धीरे-धीरे… उसका आना कम हो गया… और फिर… एक दिन… बिल्कुल बंद हो गया… दिन गुजरते गए… लेकिन बाबा का इंतज़ार… कभी खत्म नहीं हुआ… गांव वाले कहते… "बाबा… अब कौन आएगा…" लेकिन बाबा… बस मुस्कुरा देते… "मेरा मोहन… ज़रूर आएगा…" एक दिन… तेज़ बारिश हो रही थी… आसमान गरज रहा था… और पूरा गांव… अंधेरे में डूब गया… लेकिन… एक घर में… अब भी रौशनी थी… वो था… बाबा का घर… जहाँ एक छोटा सा दीया… अब भी जल रहा था… तभी… गांव में एक गाड़ी आकर रुकी… कई सालों बाद… मोहन… वापस लौटा था… भीगा हुआ… थका हुआ… वो दौड़ता हुआ… घर के अंदर गया… (pause – slow) लेकिन… बहुत देर हो चुकी थी… बाबा… खाट पर लेटे थे… और उनके पास… वही दीया जल रहा था… लेकिन… बाबा अब… इस दुनिया में नहीं थे… मोहन… फूट-फूट कर रोने लगा… उस दिन… उसे एहसास हुआ… कि शहर की चमक में… वो अपनी असली रौशनी… खो चुका था… आज भी… हर शाम… मोहन… उसी घर में… एक दीया जलाता है… शायद… किसी और मोहन को याद दिलाने के लिए… कि… अपनी जड़ों को… कभी नहीं भूलना चाहिए…
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