दस साल गुज़र चुके हैं… वक्त ने बहुत कुछ बदल दिया है… शहर वैसा ही है… लोग वैसे ही हैं… लेकिन Clyde Shelton… अब वो इंसान नहीं रहा… वो ख़ामोश है… लेकिन इस ख़ामोशी के पीछे… एक खतरनाक तूफ़ान पल रहा है… इन दस सालों में… उसने सिर्फ एक चीज़ की है… इंतज़ार… सही वक्त का इंतज़ार… सही लम्हे का इंतज़ार… और फिर… वो दिन आता है… वो मुजरिम… जिसे सज़ाए मौत सुनाई गई थी… उसकी execution का दिन… सब कुछ क़ानून के मुताबिक हो रहा होता है… Media… police… और सरकारी अहलकार सब मौजूद होते हैं… लेकिन… जैसे ही execution शुरू होती है… कुछ गलत होने लगता है… वो मुजरिम… तेज़ी से मरने के बजाए… एक दर्दनाक… और अज़ियत भरी मौत मरता है… वो चेखता है… तड़पता है… और पूरा कमरा ख़ामोश हो जाता है… यह कोई हादसा नहीं था… यह एक पैगाम था… Clyde Shelton का पहला वार… उसी दिन… दूसरा मुजरिम… जो deal की वजह से बच गया था… वो अचानक गायब हो जाता है… और फिर… उसकी लाश मिलती है… लेकिन… यह एक आम क़त्ल नहीं होता… यह एक खौफनाक… मनसूबाबंदी के साथ किया गया बदला होता है… हर ज़ख्म… हर तकलीफ… वैसी ही थी… जैसी उसने Clyde के खानदान को दी थी… यह इंसाफ़ नहीं था… यह हिसाब बराबर था… Police फ़ौरन हरकत में आती है… तहक़ीक़ात शुरू होती हैं… और बहुत जल्दी… एक नाम सामने आता है… Clyde Shelton… उसे गिरफ़्तार कर लिया जाता है… सबको लगता है… कि अब सब खत्म हो गया… क़ातिल पकड़ा जा चुका है… लेकिन… असल खेल अब शुरू होता है… Clyde जेल के अंदर है… लेकिन उसके चेहरे पर कोई खौफ़ नहीं… कोई घबराहट नहीं… बल्कि… एक अजीब सा सुकून है… जैसे… सब कुछ उसके plan के मुताबिक हो रहा हो…
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