अस्पताल पहुँचकर जब अरुण अपनी पत्नी के बारे में पूछता है, तो उसे पता चलता है कि वह घर

अस्पताल पहुँचकर जब अरुण अपनी पत्नी के बारे में पूछता है, तो उसे पता चलता है कि वह घर जा चुकी है। इसके बाद वह डॉक्टर से मिलकर अपनी शारीरिक इच्छाओं के बारे में सवाल करने लगता है। उसकी संवेदनहीनता देखकर डॉक्टर का गुस्सा फूट पड़ता है। वह उसे खरी-खोटी सुनाते हुए कहती है कि उसकी वजह से एक औरत की जान जोखिम में पड़ी और उसे अब भी सिर्फ अपनी पड़ी है। डॉक्टर उसे गार्ड्स के जरिए बाहर निकलवा देती है। अब अरुण को डर सताने लगता है कि बात बिगड़ चुकी है। ​घर लौटने पर कमलेश सीधा पुलिस के पास नहीं जाती, बल्कि फैसला करती है कि पहले पिताजी को सब सच बताया जाएगा। उधर अरुण जब घर पहुँचता है, तो रस्मों की वजह से उसे पूजा से मिलने नहीं दिया जाता। जब कमलेश उसे जेल भेजने की बात करती है, तो वह बड़ी बेशर्मी से इसे अपना अधिकार बताता है। उसे लगता है कि पति-पत्नी के बीच यह सब जायज है, जबकि वह यह नहीं देख पा रहा था कि उसने अपनी पत्नी को किस मोड़ पर खड़ा कर दिया है। अरुण को अपनी गलती का रत्ती भर भी अहसास नहीं था, वह उलटा खुद को सही मान रहा था। अगली सुबह जब उत्सव का माहौल शांत हुआ, तो कमलेश ने सबके सामने वह कड़वा सच रख दिया कि अरुण ने पूजा के साथ जबरदस्ती की है। सुकुमार के दबाव डालने पर अरुण ने औपचारिक तौर पर माफी तो माँग ली और घर के बड़ों ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। मगर कमलेश और पूजा हार मानने को तैयार नहीं थीं।

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इसी बीच घर में एक शांति पाठ का आयोजन होता है, जहाँ मोहल्ले के तमाम लोग जुटे होते हैं

इसी बीच घर में एक शांति पाठ का आयोजन होता है, जहाँ मोहल्ले के तमाम लोग जुटे होते हैं। पूजा को अपनी बात रखने का यही सही म

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मुकदमा दर्ज होते ही अरुण और उसके माता-पिता जेल पहुँच गए, पर जल्द ही उनकी जमानत हो गई

मुकदमा दर्ज होते ही अरुण और उसके माता-पिता जेल पहुँच गए, पर जल्द ही उनकी जमानत हो गई। जेल से बाहर आते ही सुकुमार ने अपने

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कमलेश ने अकेले में बाऊजी से बात की और साफ़ कहा कि इस मुद्दे को यूँ ही दबाया नहीं जा सक

कमलेश ने अकेले में बाऊजी से बात की और साफ़ कहा कि इस मुद्दे को यूँ ही दबाया नहीं जा सकता। उसने जोर देकर कहा कि घर की बहुओ

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कमलेश ने अकेले में बाऊजी से बात की और साफ़ कहा कि इस मुद्दे को यूँ ही दबाया नहीं जा सक

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