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कमलेश ने अकेले में बाऊजी से बात की और साफ़ कहा कि इस मुद्दे को यूँ ही दबाया नहीं जा सकता। उसने जोर देकर कहा कि घर की बहुओं की गरिमा का भी कोई मोल होता है। इस पर सुकुमार ने चिढ़कर पूछा कि आखिर वे चाहती क्या हैं? क्या वे पुलिस को घर बुलाकर खानदान की इज्जत नीलाम करना चाहती हैं? जब कमलेश अरुण को जेल भेजने की बात पर अड़ गई, तो सुकुमार ने सख्त लहजे में मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घर की दहलीज पर कभी पुलिस नहीं चढ़ेगी। जब कमलेश ने चेतावनी दी कि अगर घर वाले कुछ नहीं करेंगे तो उसे कदम उठाना होगा, तो सुकुमार ने दो टूक फैसला सुना दिया—अगर घर के खिलाफ जाना है, तो इस घर में कोई जगह नहीं मिलेगी। सुकुमार ने पूजा, कमलेश और उसकी बेटी का सामान बाहर फिकवा दिया और उन्हें घर से निकाल दिया। उन्हें लगा कि ये औरतें बेसहारा होकर कुछ ही घंटों में वापस लौट आएंगी। कमलेश वापस आई भी, मगर माफी माँगने नहीं बल्कि बाऊजी के पैर छूकर आशीर्वाद लेने। वह उन्हें चुनौती देकर अपने नाना के घर चली गई। नाना जी ने उन्हें एक कड़वी सच्चाई बताई कि कानून की किताबों में मैरिटल रेप को लेकर अब भी ठोस रास्ते नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर परिवार को सबक सिखाना है, तो दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करना होगा, जिसमें आसानी से जमानत नहीं मिलती। पूजा इस बात के लिए तैयार हो गई। हालांकि कमलेश को इस बात का दुख था कि निर्दोष लोग भी इसकी चपेट में आएंगे, लेकिन अरुण को सजा दिलाने के लिए उनके पास यही एक विकल्प बचा था।
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