सुकुमार ने पूजा, कमलेश और उसकी बेटी का सामान बाहर फिकवा दिया और उन्हें घर से निकाल दि

सुकुमार ने पूजा, कमलेश और उसकी बेटी का सामान बाहर फिकवा दिया और उन्हें घर से निकाल दिया। उन्हें लगा कि ये औरतें बेसहारा होकर कुछ ही घंटों में वापस लौट आएंगी। कमलेश वापस आई भी, मगर माफी माँगने नहीं बल्कि बाऊजी के पैर छूकर आशीर्वाद लेने। वह उन्हें चुनौती देकर अपने नाना के घर चली गई। ​नाना जी ने उन्हें एक कड़वी सच्चाई बताई कि कानून की किताबों में मैरिटल रेप को लेकर अब भी ठोस रास्ते नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर परिवार को सबक सिखाना है, तो दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करना होगा, जिसमें आसानी से जमानत नहीं मिलती। पूजा इस बात के लिए तैयार हो गई। हालांकि कमलेश को इस बात का दुख था कि निर्दोष लोग भी इसकी चपेट में आएंगे, लेकिन अरुण को सजा दिलाने के लिए उनके पास यही एक विकल्प बचा था। ​मुकदमा दर्ज होते ही अरुण और उसके माता-पिता जेल पहुँच गए, पर जल्द ही उनकी जमानत हो गई। जेल से बाहर आते ही सुकुमार ने अपने बेटों के साथ एक नई योजना बनाई। उन्होंने कहा कि वे बहुओं को लेने जा रहे हैं, लेकिन रास्ते में उन्होंने गाड़ी पूजा के मायके की तरफ मुड़वा दी। जब विनय ने सवाल किया, तो सुकुमार ने कहा कि वे पूजा के पिता से कुछ निजी बात करना चाहते हैं। घर पहुँचकर उन्होंने सबको कमरे से बाहर निकाल दिया और अपनी अगली शातिर चाल चलने की तैयारी करने लगे।

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सुकुमार पूजा के घर पहुँचकर शर्त रखता है कि उसे वापस आकर सबके पैर छूकर माफी मांगनी होग

सुकुमार पूजा के घर पहुँचकर शर्त रखता है कि उसे वापस आकर सबके पैर छूकर माफी मांगनी होगी। जब पूजा के पिता इस अपमानजनक शर्त

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सुकुमार पूजा के घर पहुँचकर शर्त रखता है कि उसे वापस आकर सबके पैर छूकर माफी मांगनी होग

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इतना कहकर वह बेरहमी से पूजा को कमरे से बाहर निकाल देता है

इतना कहकर वह बेरहमी से पूजा को कमरे से बाहर निकाल देता है। पूजा बिखरे हाल में, रोती हुई कमरे के बाहर खड़ी रह जाती है। वह

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लेकिन इस बार पूजा चुप नहीं रहती

लेकिन इस बार पूजा चुप नहीं रहती। वह साफ शब्दों में कहती है कि उसकी सहमति के बिना कुछ भी सही नहीं हो सकता। उसकी इच्छा के

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लेकिन इस बार पूजा चुप नहीं रहती

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