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उसी समय उसे याद आता है कि पूजा ने “कंसेंट” जैसा कोई शब्द इस्तेमाल किया था। इस शब्द का मतलब जानने के लिए वह सीधे सोना के पास पहुंचती है। सोना उसे समझाती है कि कंसेंट का मतलब होता है—किसी भी रिश्ते या स्थिति में सामने वाले की साफ और स्वेच्छा से दी गई सहमति। बिना सहमति के कुछ भी करना गलत है, चाहे रिश्ता कोई भी क्यों न हो। हर इंसान को अपने शरीर और फैसलों पर पूरा अधिकार होता है। यह बात सुनकर कमलेश धीरे-धीरे चीजों को समझने लगती है। उसके नजरिए में बदलाव आने लगता है। इसी दौरान परिवार वाले अरुण और पूजा को हनीमून पर भेज देते हैं। वहां पूजा एक बार फिर कोशिश करती है कि सब कुछ ठीक हो जाए। वह अरुण से कहती है कि जो हुआ उसे पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत करें, और पति-पत्नी बनने से पहले दोस्त बनें। लेकिन अरुण उसकी बात को नजरअंदाज कर देता है और फिर से उसकी इच्छा के खिलाफ जाता है। हनीमून से लौटने के बाद पूजा की हालत और भी खराब हो जाती है। उसका जीवन जैसे एक बोझ बन जाता है। अरुण लगातार उसके साथ जबरदस्ती करता रहता है। एक रात, खुद को बचाने के लिए पूजा बहाना बनाती है कि उसे पीरियड्स हो रहे हैं। लेकिन अरुण उस पर भी भरोसा नहीं करता और उसे साबित करने के लिए कहता है। मजबूरी में, और किसी रास्ते के बिना, पूजा खुद को चोट पहुंचा लेती है
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