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जब घरवालों को यह बात पता चलती है, तो वे कमलेश से नाराज हो जाते हैं। उसका पति विनय भी उसे समझाता है कि वह जाकर मामला संभाले, क्योंकि यह इतनी बड़ी बात नहीं थी। लेकिन कमलेश अपने फैसले पर अड़ी रहती है और माफी मांगने से इनकार कर देती है। हालांकि, अरुण के बार-बार मनाने पर उसका दिल पिघल जाता है। कुछ समय बाद पूजा खुद उनके घर आती है। इस बार कमलेश आगे बढ़कर उससे माफी मांगती है और स्वीकार करती है कि उसे दुनिया की ज्यादा समझ नहीं है। वह बताती है कि उसने हमेशा घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही जीवन बिताया है और बाहर की दुनिया के बारे में उसे बहुत कम जानकारी है—घर संभालना ही उसकी दुनिया रही है। इसके बाद पूजा भी रैली वाली बात के लिए माफी मांग लेती है। इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच की दूरियां खत्म हो जाती हैं और रिश्ता फिर से जुड़ जाता है। अब शादी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और घर में खुशियों का माहौल बन जाता है। शादी वाले दिन पूजा की तबीयत ठीक नहीं होती—उसे तेज बुखार होता है और चक्कर भी आ रहे होते हैं। उसकी दोस्त सोना, जो उसके साथ रैलियों में शामिल होती थी, उसे दवा देती है ताकि वह किसी तरह शादी की रस्में पूरी कर सके। आखिरकार, सिंदूर और सात फेरों के साथ शादी संपन्न हो जाती है।
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