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लेकिन इस बार पूजा चुप नहीं रहती। वह साफ शब्दों में कहती है कि उसकी सहमति के बिना कुछ भी सही नहीं हो सकता। उसकी इच्छा के खिलाफ जो हुआ, वह गलत है। आखिरकार, कुछ समय के लिए मामला शांत हो जाता है और कमलेश उसे वापस घर ले आती है। वहां घर के बड़े भी पूजा को समझाने की कोशिश करते हैं कि घर छोड़ने से समस्या हल नहीं होती और परिवार की इज्जत का ध्यान रखना चाहिए। फिलहाल बात को यहीं दबा दिया जाता है, लेकिन अंदर ही अंदर बहुत कुछ अधूरा और अनसुलझा रह जाता है। लेकिन पूजा ने जो बात अरुण के बारे में कही थी, वह कमलेश के मन में कहीं न कहीं अटक जाती है। इसी उलझन में वह अपने पति से पूछती है कि कुछ साल पहले अरुण की कुछ लड़कों से जो लड़ाई हुई थी, उसकी वजह क्या थी। पति इसे सामान्य कॉलेज की लड़ाई बताकर टाल देता है। कमलेश भी बात आगे नहीं बढ़ाती, लेकिन अंदर ही अंदर उसे महसूस होता है कि अगर अरुण से कोई गलती हुई है, तो उसकी परवरिश में उसकी भी जिम्मेदारी बनती है। इसी बीच एक दिन उसकी बेटी पिंकी उससे पूछती है कि “एआई” क्या होता है। कमलेश को इसका जवाब नहीं पता होता। तभी पड़ोस की एक औरत समझाती है कि जब मशीनें इंसानों की तरह सोचने और समझने लगती हैं, उसे एआई कहते हैं। वह यह भी बताती है कि यह खबर अखबार के पहले पन्ने पर छपी थी। यह सुनकर कमलेश को एहसास होता है कि दुनिया कितनी बदल रही है, और उसे कितनी कम जानकारी है।
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