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शादी के बाद वह रात आती है जिसे हर दुल्हन खास मानती है। सुहागरात के वक्त अरुण कमरे में आता है। कुछ औपचारिक बातें करने के बाद वह पूजा के करीब आने लगता है। लेकिन पूजा, जो पहले से ही बुखार और दर्द से परेशान होती है, साफ शब्दों में उसे मना करती है। वह कहती है कि उसकी तबीयत बहुत खराब है और आज वह किसी भी तरह से तैयार नहीं है। इसके बावजूद अरुण उसकी बात को नजरअंदाज कर देता है। पूजा के बार-बार मना करने, रोने और विनती करने के बावजूद वह अपनी जिद में अड़ा रहता है और उसकी इच्छा के खिलाफ जबरदस्ती करता है। उस रात पूजा के सारे सपने चकनाचूर हो जाते हैं। सुबह होते ही कमरे में रोशनी तो आ जाती है, लेकिन पूजा के भीतर जैसे अंधेरा भर जाता है। वह दर्द और सदमे में टूट चुकी होती है और लगातार रो रही होती है। अरुण उसे शांत कराने की कोशिश करता है, जैसे कुछ खास हुआ ही न हो। वह इसे अपना “हक” बताता है और कहता है कि शादी के बाद यह सब सामान्य है। यह सुनकर पूजा के अंदर का दर्द फूट पड़ता है। वह रोते हुए अरुण की तरफ देखती है और कहती है कि उसने उसका हक नहीं, बल्कि उसके साथ गलत किया है। यह सुनकर अरुण चौंक जाता है, लेकिन अपनी गलती मानने के बजाय उल्टा गुस्से में आ जाता है। वह उसे चुनौती देते हुए कहता है कि अगर उसे लगता है कि कुछ गलत हुआ है, तो जाकर सबको बता दे।
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