शीर्षक: रहस्यमयी कुएं का राज रामपुरा गांव छोटा था, लेकिन उसकी कहानियाँ बड़ी मशहूर थीं। गांव के बाहर एक पुराना कुआं था, जिसके पास जाने से लोग कतराते थे। कहते थे, उस कुएं में कोई रहस्य छुपा है। एक दिन, शहर से आया चंचल और नटखट लड़का अर्जुन गांव में रहने आया। उसे इन बातों पर विश्वास नहीं था। उसने ठान लिया कि वह इस कुएं का सच पता लगाएगा। शाम का समय था। आसमान लाल हो रहा था और पक्षियों की आवाज़ें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। अर्जुन चुपके से कुएं के पास पहुँचा। जैसे ही उसने अंदर झांका, उसे हल्की-सी चमक दिखाई दी। “ये क्या है?” उसने खुद से कहा। अचानक पीछे से आवाज़ आई— “वहाँ मत देखो!” अर्जुन घबरा गया। उसने मुड़कर देखा तो एक बुजुर्ग खड़े थे। उन्होंने कहा, “ये कुआं साधारण नहीं है। जो भी लालच में आकर इसमें झांकता है, वो कुछ खो देता है।” अर्जुन हँस पड़ा, “मैं नहीं डरता।” वह फिर से कुएं में झांका। इस बार उसे सोने के सिक्के दिखे। उसकी आँखें चमक उठीं। जैसे ही उसने हाथ अंदर डाला, अचानक उसका मोबाइल हाथ से गिरकर कुएं में चला गया। वो घबरा गया। तभी बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, “समझे? यह कुआं लालच की परीक्षा लेता है।” अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने सिर झुकाकर माफी मांगी। अगले दिन से उसने गांव वालों को इस कुएं की सच्चाई बताई। अब लोग डरते नहीं थे, बल्कि समझदारी से रहते थे। सीख: लालच हमेशा कुछ न कुछ छीन लेता है, लेकिन समझदारी हमें सही रास्ता दिखाती है।
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