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सोना बताती है कि उनका संगठन उन महिलाओं की मदद करता है जो हिंसा या शोषण का शिकार होती हैं। इस पर कमलेश अपनी पुरानी सोच के तहत महिलाओं को ही दोष देती है, लेकिन सोना उसे एक सीधा सवाल पूछती है—अगर औरतें अपने ही घर में सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर वे कहां सुरक्षित होंगी? यह बात कमलेश को सोचने पर मजबूर कर देती है। कुछ समय बाद सोना को पता चलता है कि पूजा एक सुनसान पार्क में है। वह उससे मिलने जाती है और उसकी हालत समझने की कोशिश करती है, लेकिन पूजा डर और झिझक के कारण कुछ नहीं कह पाती। सोना उसे भरोसा दिलाती है कि वह उसके साथ है और चाहे तो वह कमलेश से भी बात कर सकती है। तभी कमलेश वहां पहुंच जाती है। वह पूजा से सीधे पूछती है कि आखिर समस्या क्या है और कब तक वह इस तरह भागती रहेगी। काफी हिम्मत जुटाकर पूजा सच्चाई बताती है कि अरुण ने उसके साथ जबरदस्ती की। यह सुनते ही कमलेश गुस्से में उसे थप्पड़ मार देती है और उसकी बात मानने से इनकार कर देती है। वह इसे पति-पत्नी के बीच की सामान्य बात बताती है। लेकिन इस बार पूजा चुप नहीं रहती। वह साफ शब्दों में कहती है कि उसकी सहमति के बिना कुछ भी सही नहीं हो सकता। उसकी इच्छा के खिलाफ जो हुआ, वह गलत है।
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