इसी बीच घर में एक शांति पाठ का आयोजन होता है, जहाँ मोहल्ले के तमाम लोग जुटे होते हैं

इसी बीच घर में एक शांति पाठ का आयोजन होता है, जहाँ मोहल्ले के तमाम लोग जुटे होते हैं। पूजा को अपनी बात रखने का यही सही मौका दिखता है। वह भरी सभा में खड़ी होकर ऐलान करती है कि अरुण ने उसकी मर्जी के बिना उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं। वह चीख-चीख कर कहती है कि शादी के पहले दिन से उसका रेप किया जा रहा है। सुकुमार उसे चुप कराने और लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमलेश बीच में ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। वह वहाँ मौजूद महिलाओं को एकजुट करती है और कहती है कि अगर आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को न्याय कभी नहीं मिलेगा। ​जब अरुण गुस्से में आकर पूजा पर हाथ उठाने की कोशिश करता है, तो कमलेश उसे रोककर एक जोरदार तमाचा जड़ देती है। वह घोषणा करती है कि अब फैसला सिर्फ अदालत नहीं, बल्कि समाज और परिवार करेगा। कमलेश अरुण का सामाजिक बहिष्कार करते हुए कहती है कि आज से उसका इस घर की किसी औरत से कोई रिश्ता नहीं है। वह न किसी पूजा में बैठेगा और न ही परिवार की किसी रस्म का हिस्सा बनेगा। यहाँ तक कि वह अपनी भतीजी की डोली को कंधा देने का हक भी खो चुका है। ​चारों तरफ से खुद को अकेला और अपमानित पाकर अरुण का अहंकार चूर-चूर हो जाता है। वह फूट-फूटकर रोते हुए पूजा के पैरों में गिर पड़ता है और माफी की भीख माँगता है। लेकिन अब पूजा बदल चुकी थी। वह अपने पैर पीछे खींच लेती है और दो टूक कहती है कि महज एक माफी से रूह के जख्म नहीं भरते। वह उसे चेतावनी देती है कि भले ही आज देश में मैरिटल रेप को लेकर सख्त कानून न हो, लेकिन जिस दिन भी यह कानून बनेगा, वह सबसे पहली शिकायत उसी के खिलाफ दर्ज कराएगी। वह उम्र भर उस इंसाफ के दिन का इंतजार करेगी। कहानी इसी मजबूत फैसले के साथ समाप्त होती है।
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