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एक समय की बात है। एक छोटे से गाँव में रघु नाम का गरीब ब्राह्मण रहता था। उसके पास न धन था, न कोई बड़ा घर… लेकिन उसके दिल में भगवान के लिए सच्ची भक्ति थी। हर दिन वह सुबह उठकर नदी से पानी लाता, एक छोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाता और पूरे मन से भगवान शिव का नाम जपता— "ॐ नमः शिवाय…" गाँव के लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे। वे कहते— “भक्ति से कभी किसी का पेट नहीं भरता!” लेकिन रघु हमेशा मुस्कुराकर कहता— “भगवान सब देख रहे हैं, वही मेरा सहारा हैं।” एक दिन गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। खेत सूख गए, पानी खत्म हो गया, और लोग परेशान हो गए। सबने भगवान को दोष देना शुरू कर दिया। लेकिन रघु ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। वह रोज़ की तरह शिवलिंग पर जल चढ़ाने गया… लेकिन उस दिन नदी भी सूख चुकी थी। रघु की आँखों में आँसू आ गए… उसने अपने कमंडल में बचा हुआ आखिरी पानी भगवान शिव को अर्पित कर दिया और बोला— “हे भोलेनाथ, मेरे पास देने के लिए अब कुछ नहीं है… बस मेरी भक्ति ही स्वीकार कर लो।” इतना कहते ही अचानक आसमान में बादल छा गए और तेज़ बारिश शुरू हो गई पूरा गाँव खुश हो गया! खेत फिर से हरे हो गए। गाँव वाले समझ गए कि यह चमत्कार रघु की सच्ची भक्ति का फल है। अब वही लोग जो उसका मज़ाक उड़ाते थे, उसके चरण छूने लगे। रघु ने बस इतना कहा— भगवान को दिखावा नहीं, सच्चा दिल चाहिए।” सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान जरूर प्रसन्न होते हैं, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।
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