मुकदमा दर्ज होते ही अरुण और उसके माता-पिता जेल पहुँच गए, पर जल्द ही उनकी जमानत हो गई

मुकदमा दर्ज होते ही अरुण और उसके माता-पिता जेल पहुँच गए, पर जल्द ही उनकी जमानत हो गई। जेल से बाहर आते ही सुकुमार ने अपने बेटों के साथ एक नई योजना बनाई। उन्होंने कहा कि वे बहुओं को लेने जा रहे हैं, लेकिन रास्ते में उन्होंने गाड़ी पूजा के मायके की तरफ मुड़वा दी। जब विनय ने सवाल किया, तो सुकुमार ने कहा कि वे पूजा के पिता से कुछ निजी बात करना चाहते हैं। घर पहुँचकर उन्होंने सबको कमरे से बाहर निकाल दिया और अपनी अगली शातिर चाल चलने की तैयारी करने लगे। सुकुमार पूजा के घर पहुँचकर शर्त रखता है कि उसे वापस आकर सबके पैर छूकर माफी मांगनी होगी। जब पूजा के पिता इस अपमानजनक शर्त को ठुकरा देते हैं, तो सुकुमार अपनी शातिर चाल चलता है। वह धोखे से उनके पानी में नींद की गोलियां मिला देता है और पहले से ही अस्पताल में एक कमरा सुरक्षित कर लेता है। उसका मकसद पूजा को भावनात्मक रूप से मजबूर करना था। जैसे ही पूजा को खबर मिलती है कि उसके पिता बेहोश हो गए हैं, वह बदहवास होकर अस्पताल पहुँचती है। पिता की हालत देखकर वह टूट जाती है और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर अरुण माफी का नाटक करता है। पिता के हाथ जोड़ने पर मजबूर होकर पूजा को न चाहते हुए भी ससुराल लौटना पड़ता है। ​घर का माहौल ऐसा दिखाया गया जैसे सब कुछ सामान्य हो गया हो, लेकिन तभी कहानी में एक बड़ा मोड़ आता है। घर की वह बुजुर्ग दादी, जो सालों से खामोश थीं, अचानक बोल पड़ती हैं। वे दोनों बहुओं को समझाती हैं कि अगर आज वे चुप रह गईं, तो यह जुल्म कभी नहीं थमेगा। वे कहती हैं कि समाज के डर को छोड़कर अपनी आपबीती दुनिया को बतानी होगी।
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