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अगली सुबह, जब कमलेश पूजा-पाठ कर रही होती है, उसकी नजर छत पर खड़ी पूजा पर पड़ती है। वह तुरंत घबरा जाती है और उसके पास जाकर पूछती है कि क्या हुआ। पूजा रोते हुए बस इतना कहती है कि उसे अपने घर जाना है। इसके बाद कमलेश उसे संभालती है और घर के रिवाज के अनुसार उसे पहली रसोई के लिए रसोई में ले जाती है। काम पूरा होते ही कमलेश समझ जाती है कि पूजा यहां रुकना नहीं चाहती, इसलिए वह उसे खुद उसके मायके छोड़ने का फैसला करती है। घर पहुंचकर, जब पूजा अपनी मां के साथ अकेली होती है, तो वह टूटकर सारी सच्चाई बता देती है। लेकिन उसकी मां उसे समझने के बजाय इसे सामान्य बात कहकर टाल देती है। वह कहती है कि शादी के बाद यह सब चलता है और परिवार की इज्जत और वंश के लिए यह जरूरी है। अपनी मां की यह सोच सुनकर पूजा अंदर से हिल जाती है। ऊपर से मां उसे सख्ती से वापस ससुराल जाने को कहती है, क्योंकि समाज में बदनामी का डर ज्यादा बड़ा होता है। अब पूजा के पास कोई सहारा नहीं बचता। वह मजबूरी में कमलेश के साथ वापस लौटने लगती है। लेकिन रास्ते में वह बहाना बनाकर वॉशरूम जाती है और वहां से चुपचाप निकल जाती है। उसके अचानक गायब होने से घर में हड़कंप मच जाता है। कमलेश उसे हर जगह ढूंढती है, और आखिरकार उसकी दोस्त सोना के एनजीओ तक पहुंचती है।
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