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एक छोटे से गाँव में… जहाँ सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता था… वहाँ रहता था एक छोटा सा लड़का… चिंटू। चिंटू को पढ़ना बहुत पसंद था… लेकिन अंधेरा उसकी सबसे बड़ी दुश्मन था। हर रात… वो आसमान की तरफ देखता… और सोचता— "काश… मेरे पास भी रोशनी होती…" एक दिन… उसने ठान लिया— "मैं खुद अपनी रोशनी बनाऊँगा!" गाँव वाले हँस पड़े— "अरे, ये छोटा बच्चा क्या बदलाव लाएगा?" लेकिन चिंटू नहीं रुका… दिन में मेहनत… रात में कोशिश… कभी असफलता… तो कभी उम्मीद… उसने कबाड़ से चीजें इकट्ठा की— पुरानी बैटरी… तार… और टूटे खिलौने… कई दिनों की मेहनत के बाद… आख़िरकार… वो दिन आ ही गया… एक छोटी सी रोशनी जली… और उस रोशनी ने… चिंटू की दुनिया बदल दी। धीरे-धीरे… पूरे गाँव में ये खबर फैल गई… लोग उसके पास आने लगे… और चिंटू ने… सबको सिखाया— कैसे खुद अपनी रोशनी बनाई जाती है। अब… हर घर में उजाला था… हर बच्चे के हाथ में किताब थी… एक दिन गाँव के बुजुर्ग ने कहा— "बेटा, तुमने सिर्फ अंधेरा नहीं हटाया… हमारी सोच भी बदल दी…" चिंटू मुस्कुराया… और बोला— "असली रोशनी… दीपक से नहीं… सोच से आती है…" अगर इरादा मजबूत हो… तो छोटा सा दीपक भी… पूरी दुनिया रोशन कर सकता है…
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