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एक छोटे से गाँव "रामपुर" में रहता था एक लड़का, जिसका नाम मोहन था। वह बहुत गरीब था, लेकिन दिल का बहुत अच्छा था। मोहन हर दिन स्कूल जाता था और लौटकर अपनी माँ की मदद करता था। उसके पास ज़्यादा खिलौने या अच्छे कपड़े नहीं थे, लेकिन वह कभी शिकायत नहीं करता था। एक दिन रास्ते में उसे 100 रुपये का नोट मिला। वह बहुत खुश हुआ, क्योंकि इतने पैसों से वह अपने लिए कुछ अच्छा खरीद सकता था। लेकिन तभी उसने देखा कि सामने एक बूढ़ी अम्मा परेशान होकर कुछ ढूंढ रही थीं। मोहन ने पूछा, "अम्मा, क्या हुआ?" अम्मा बोलीं, "बेटा, मेरे 100 रुपये कहीं गिर गए हैं, उसी से दवाई लेनी थी।" मोहन कुछ पल के लिए चुप रहा… फिर उसने वो 100 रुपये अम्मा को दे दिए। अम्मा की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने कहा, "बेटा, तुम बहुत अच्छे हो, भगवान तुम्हें जरूर खुश रखेगा।" मोहन मुस्कुरा दिया और घर चला गया। अगले दिन जब वह स्कूल गया, तो वहाँ एक सर आए हुए थे। उन्होंने मोहन को बुलाया और कहा, "तुम्हारी ईमानदारी के बारे में हमें पता चला है। अब से तुम्हारी पढ़ाई का पूरा खर्च हम उठाएंगे।" यह सुनकर मोहन की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। धीरे-धीरे मोहन पढ़-लिखकर एक अच्छा इंसान बन गया और अपनी माँ की सारी परेशानियाँ दूर कर दीं। उस दिन मोहन को समझ आया—छोटी सी अच्छाई भी ज़िंदगी बदल सकती है।
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