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उजियारपुर प्रखंड के रायपुर पंचायत अंतर्गत मरघट (श्मशान घाट) की जमीन पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला सामने आने से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। बताया जा रहा है कि संवेदक द्वारा मिट्टी खनन के दौरान उस भूमि पर कार्य किया गया, जिसे वर्षों से हिन्दू समाज के अंतिम संस्कार स्थल के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि इस भूमि में उनके पूर्वजों के अवशेष (हड्डी-कंकाल) मौजूद हैं, इसलिए किसी भी हालत में यहां खनन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो वे अपनी जान तक दे देंगे, लेकिन मरघट की मिट्टी नहीं खोदने देंगे। मामले की सूचना मिलने पर अंचलाधिकारी आकाश कुमार मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। उन्होंने बताया कि जिस खेसरा में मरघट स्थित है, उसके पीछे की जमीन पर संवेदक को खनन विभाग से अनुमति मिली हुई है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट की जमीन का अब तक सही सीमांकन नहीं हुआ है, जिससे विवाद की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर मांग की है कि मरघट की भूमि का जल्द से जल्द सीमांकन कराया जाए और खनन कार्य पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए। गौरतलब है कि संबंधित संवेदक पहले भी लखानीपुर महेशपट्टी पंचायत में खनन कार्य को लेकर विवादों में रह चुका है, जहां मानव कंकाल मिलने की बात भी सामने आई थी। फिलहाल प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद खनन कार्य को रोक दिया गया है, लेकिन क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
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