"बहुत साल पहले की बात है…" "एक उदास… धुंधली रविवार की शाम…" "मैं… अपनी साइकिल पर… एक

"बहुत साल पहले की बात है…" "एक उदास… धुंधली रविवार की शाम…" "मैं… अपनी साइकिल पर… एक सुनसान देहाती सड़क से गुजर रहा था…" "तभी… अचानक… भयंकर तूफान शुरू हो गया…" "मूसलाधार बारिश होने लगी…" "और आसपास… कहीं भी छिपने की जगह नहीं थी…" "तभी… सड़क के किनारे… मुझे एक बड़ा-सा पुराना मकान दिखाई दिया…" "वह… किसी छोड़ी हुई हवेली जैसा लग रहा था…" "दीवारों पर… जहरीली बेलें फैली हुई थीं…" "खिड़कियाँ… लकड़ी के तख्तों से बंद थीं…" "और साफ पता चल रहा था… कि वह जगह… कई सालों से वीरान पड़ी थी…" "मैंने… अंदर जाकर… बारिश रुकने तक रुकने का फैसला किया…" "दरवाज़ा… खुला हुआ था…" "अंदर घुसते ही…" "सीलन… गीली लकड़ी… और सड़ांध की बदबू ने… मेरा स्वागत किया…" "तभी… मेरी नज़र… धूल पर पड़े घसीटने के निशानों पर गई…" "लेकिन… वहाँ किसी इंसान के पैरों के निशान नहीं थे…" "सिर्फ… घसीटने के निशान…" "सीढ़ियों के पास… एक पुराना कोट टंगा हुआ था…" "उसकी पीठ पर… जला हुआ छोटा-सा छेद था…" "बिल्कुल… गोली के निशान जैसा…" "उसे देखते ही… मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई…" "और तभी… मुझे महसूस हुआ…" "कि उस घर में… कुछ बहुत गलत था…" "कुछ… बहुत बुरा…"
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