सब कुछ बदलने वाला था

“उस रात... राठौर हवेली में... सब कुछ बदलने वाला था...” “बाहर तेज़ बारिश हो रही थी... और अंदर... एक पुराना राज़ जाग चुका था...” “सावित्री राठौर... एक अमीर... घमंडी औरत... जिसे गरीब लोगों से नफ़रत थी...” “लेकिन उस रात... उसकी आँखों में... सिर्फ डर था...” “हवेली के दरवाज़े पर... धीरे से दस्तक हुई...” “दरवाज़ा खुला... और अंदर आया... एक डिलीवरी बॉय... अर्जुन...” “भीगा हुआ चेहरा... खामोश आँखें... और हाथ पर... पुराना जला हुआ निशान...” “सावित्री जैसे पत्थर बन गई...” “क्योंकि ऐसा ही निशान... उस बच्चे के हाथ पर था... जो सालों पहले... आग में गायब हो गया था...” “सबको लगा था... वो मर चुका है...” “लेकिन शायद... वो ज़िंदा था...” “और आज... वो लौट आया था...” “सावित्री ने तुरंत... सब नौकरों को बाहर भेज दिया...” “पूरा हॉल खाली हो गया...” “अब वहाँ... सिर्फ दो लोग थे... सावित्री... और अर्जुन...” “सावित्री की आवाज़ कांप रही थी... उसने धीरे से पूछा... ‘तुम... कौन हो?’” “लेकिन अर्जुन... बस हल्का सा मुस्कुराया...” “एक अजीब मुस्कान... जिसमें दर्द भी था... और नफ़रत भी...” “उस रात... सावित्री सो नहीं पाई...” “क्य
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