बहुत समय पहले एक घने जंगल के पास एक छोटा सा गाँव था

बहुत समय पहले एक घने जंगल के पास एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में एक गरीब लड़का रहता था, जिसका नाम अर्जुन था। एक दिन अर्जुन जंगल में लकड़ियाँ काटने गया। तभी उसे एक घायल हरा तोता दिखाई दिया। अर्जुन ने प्यार से तोते को उठाया और घर ले आया। उसने उसकी मरहम-पट्टी की और खाना खिलाया। कुछ दिनों बाद तोता ठीक हो गया। तभी अचानक तोता इंसानों की तरह बोल पड़ा— “अर्जुन, तुमने मेरी जान बचाई है। मैं कोई साधारण तोता नहीं, बल्कि जादुई तोता हूँ।” अर्जुन यह सुनकर हैरान रह गया। तोते ने कहा, “मैं तुम्हारी हर अच्छी इच्छा पूरी कर सकता हूँ, लेकिन लालच मत करना।” अर्जुन ने सबसे पहले अपने गरीब माता-पिता के लिए खाना और छोटा सा घर माँगा। देखते ही देखते टूटी झोपड़ी सुंदर घर में बदल गई और घर में अनाज भर गया। धीरे-धीरे गाँव वालों को जादुई तोते के बारे में पता चल गया। गाँव का लालची ज़मींदार भी यह बात सुनकर अर्जुन के घर पहुँचा। उसने तोते को चुराने की योजना बनाई। एक रात ज़मींदार चुपके से तोते को पिंजरे में बंद करके ले गया और बोला, “अब मेरे लिए सोना बरसा दो!” लेकिन जादुई तोता गुस्सा हो गया। उसने अपनी जादुई शक्ति से ज़मींदार के महल को कद्दू में बदल दिया और उसके सारे सोने को पत्थर बना दिया। डरा हुआ ज़मींदार माफी माँगने लगा। तब तोते ने कहा— “जादू हमेशा अच्छे दिल वालों के लिए होता है, लालची लोगों के लिए नहीं।” इसके बाद ज़मींदार ने अपनी गलती मान ली और अच्छा इंसान बन गया। अर्जुन और जादुई तोता खुशी-खुशी रहने लगे। सीख: लालच बुरी बला है, और सच्ची दया हमेशा फल देती है।
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