गिलहरी और दादी की अनोखी दोस्ती गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। उस घर में एक बूढ़ी दादी अकेली रहती थीं। उनके सफेद बाल, झुर्रियों भरा चेहरा और हमेशा मुस्कुराती आँखें पूरे गाँव में मशहूर थीं। दादी का कोई अपना नहीं था, इसलिए वे अपना समय पेड़-पौधों और पक्षियों के साथ बिताती थीं। घर के आँगन में एक बड़ा आम का पेड़ था। उसी पेड़ पर एक छोटी-सी गिलहरी रहती थी। उसकी चमकती आँखें और फुर्तीली पूँछ बहुत प्यारी लगती थी। दादी रोज सुबह आँगन में बैठकर रोटियों के छोटे-छोटे टुकड़े डालतीं, और गिलहरी फुदकते हुए नीचे आ जाती। पहले वह डरती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे दादी पर भरोसा हो गया। कुछ ही दिनों में दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। दादी उसे “चुनमुन” कहकर बुलाती थीं। जैसे ही दादी आवाज लगातीं, “चुनमुन…!” गिलहरी तुरंत पेड़ से उतर आती और दादी के कंधे पर चढ़ जाती। यह देखकर गाँव के बच्चे भी बहुत खुश होते। एक दिन तेज बारिश शुरू हो गई। हवा इतनी तेज चल रही थी कि पेड़ की डालियाँ हिलने लगीं। दादी खिड़की से बाहर देख रही थीं कि अचानक उन्होंने देखा—चुनमुन का छोटा-सा घोंसला टूटकर नीचे गिर गया। गिलहरी घबराकर इधर-उधर दौड़ रही थी। दादी तुरंत बाहर गईं। उन्होंने भीगते हुए घोंसले को उठाया और चुनमुन को अपने घर के अंदर ले आईं। फिर पुराने कपड़ों और सूखी घास से एक नया छोटा-सा घर बनाया। चुनमुन धीरे-धीरे उसमें जाकर बैठ गई। उसकी आँखों में जैसे खुशी और धन्यवाद दोनों दिखाई दे रहे थे। उस दिन के बाद चुनमुन दादी से और भी ज्यादा प्यार करने लगी। वह सुबह दादी के साथ बैठती, उनके हाथ से खाना खाती और कभी-कभी उनके सिर पर चढ़कर खेलती। दादी का अकेलापन भी अब खत्म हो गया था। एक शाम दादी बीमार पड़ गईं। वे बिस्तर से उठ नहीं पा रही थीं। चुनमुन बार-ब
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