यह सब कष्ट क्यों उठाया

यह सब कष्ट क्यों उठाया? भगवान जगन्नाथ ने बड़ी कोमलता से कहा— "माधव! जो प्रारब्ध (Karma) है, उसे तो भोगना ही पड़ता है। अगर मैं तुम्हारा रोग मिटा देता, तो तुम्हें अगले जन्म में इसे भोगना पड़ता। मैं नहीं चाहता था कि मेरे भक्त को दोबारा जन्म लेना पड़े। इसलिए, तुम्हारे कष्ट को कम करने के लिए मैं खुद तुम्हारी सेवा करने आया।" यह सुनकर माधव दास की आँखों से आंसुओं की धारा बह निकली। धन्य है वह प्रभु और धन्य है उसकी करुणा! निष्कर्ष: दोस्तों, माधव दास की यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर हमारी भक्ति सच्ची है, तो ईश्वर न केवल हमारे साथ होते हैं, बल्कि वे हमारे दुखों को अपना बना लेते हैं। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो 'जय जगन्नाथ' कमेंट जरूर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।

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जहाँ भगवान सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि साक्षात जीवंत देवता हैं

जगन्नाथ पुरी... जहाँ भगवान सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि साक्षात जीवंत देवता हैं। यहाँ की हवाओं में भक्ति है और कण-क

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