घने जंगल के किनारे बसे एक छोटे से गाँव में अजीब डर फैला हुआ था

घने जंगल के किनारे बसे एक छोटे से गाँव में अजीब डर फैला हुआ था। लोग कहते थे—रात होते ही एक भेड़िया निकलता है, जिसकी आँखों में ऐसा आकर्षण है कि जो उसे देख ले, उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है। गाँव वाले दरवाज़े जल्दी बंद कर लेते। बच्चों को सख़्त मना था कि अंधेरा होने के बाद बाहर न निकलें। लेकिन 12 साल का नील जिज्ञासु था। उसने ठान लिया कि वह इस रहस्य को खुद देखेगा। एक रात, चाँदनी में, नील चुपचाप जंगल की ओर गया। पेड़ों के बीच उसे दो चमकती आँखें दिखीं। वही भेड़िया। नील डर गया, पर भागा नहीं। उसे सच में लगा जैसे कोई उसे बुला रहा हो। भेड़िया मुड़ा… और धीरे-धीरे चलने लगा। नील भी उसके पीछे-पीछे। काफी अंदर जाने पर नील ने देखा—एक पुराना गड्ढा, जिसमें एक छोटा भेड़िया (उसका बच्चा) गिरा हुआ था। वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। नील समझ गया। यह आकर्षण नहीं था। यह एक माँ की बेबसी थी, जो मदद चाहती थी। नील दौड़कर गाँव गया, लोगों को बुलाया। सब रस्सी और लकड़ी लेकर आए। मिलकर उन्होंने बच्चे को बाहर निकाला। माँ भेड़िया ने नील की ओर देखा। उसकी आँखों में अब डर नहीं, कृतज्ञता थी। वह अपने बच्चे के साथ जंगल में खो गई। अगली सुबह गाँव में कोई डर नहीं था। लोगों को समझ आ गया था— कभी-कभी जो हमें डराता है, वह सिर्फ मदद माँग रहा होता है।
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