“उस रात एक गरीब बूढ़ी माँ ने जिस बच्चे को माखन खिलाया… सुबह पता चला कि वो कोई साधारण

“उस रात एक गरीब बूढ़ी माँ ने जिस बच्चे को माखन खिलाया… सुबह पता चला कि वो कोई साधारण बच्चा नहीं… स्वयं Krishna थे… और मंदिर में जो चमत्कार हुआ… उसे देखकर पूरा गाँव काँप उठा…” गाँव के किनारे एक छोटी सी टूटी हुई झोपड़ी थी। उस झोपड़ी में एक बूढ़ी माँ अकेली रहती थी। उसका इस दुनिया में कोई नहीं था। न परिवार… न सहारा… बस उसकी जिंदगी में एक ही सहारा था — उसके कान्हा। हर सुबह सूरज निकलने से पहले वो उठ जाती। अपने छोटे से मंदिर को साफ करती… दीपक जलाती… और अपने हाथों से ताज़ा माखन बनाती। फिर प्यार से Krishna की मूर्ति के सामने कटोरी रखकर कहती— “कान्हा… मैंने तुम्हारे लिए माखन बनाया है… आकर खा लेना…” गाँव वाले रोज़ उसे देखकर हँसते थे। “देखो… बूढ़ी माँ पागल हो गई है…” “भगवान कहीं सच में आते हैं क्या?” लेकिन बूढ़ी माँ कभी दुखी नहीं होती थी। उसकी आँखों में सिर्फ विश्वास था। समय बीतता गया… एक रात गाँव में भयंकर तूफ़ान आया। आसमान में जोर-जोर से बिजली चमक रही थी। बारिश इतनी तेज़ थी कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे। लेकिन उस तूफ़ानी रात में भी बूढ़ी माँ मंदिर के सामने बैठी थी। उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था… बस थोड़ा सा माखन बचा था। उसने वही आखिरी माखन कटोरी में रखा और हाथ जोड़कर बोली— “कान्हा… आज बस इतना ही है… अगर भूख लगी हो तो आ जाना…” रात और गहरी होती गई… तभी अचानक झोपड़ी के बाहर एक छोटे बच्चे की आवाज़ आई— “माँ… बहुत भूख लगी है…” बूढ़ी माँ ने धीरे से दरवाज़ा खोला… और सामने जो देखा… उसे देखकर उसकी साँसें रुक गईं।
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