समर प्रताप सिंह पेशे से एक पुरातत्वविद् (Archaeologist) थे। उन्हें पुरानी और रहस्यमयी चीज़ें इकट्ठा करने का जुनून था। दिल्ली के एक पुराने और संकरे बाज़ार के कबाड़खाने में उन्हें एक अजीब सी घड़ी मिली। वह घड़ी आम घड़ियों जैसी नहीं थी; उसमें चौबीस के बजाय तीस घंटे के निशान थे, और उसकी सुइयाँ उल्टी दिशा में घूम रही थीं। कबाड़खाने के बूढ़े मालिक ने समर को चेतावनी दी थी, "बाबूजी, इसे मत ले जाओ। यह वक़्त
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