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Title: “काली रात का साया” (Part 1) महाराष्ट्र के एक दूर के गाँव “खेरवाड़ी” में एक अजीब डर फैला हुआ था। लोग कहते थे कि हर शनिवार और रविवार की रात, 12 बजे के बाद… कोई “साया” गाँव में घूमता है। जो भी उसे देखता है… वो अगली सुबह नहीं मिलता। अर्जुन, शहर से आया एक लड़का, इन बातों पर यकीन नहीं करता था। वो अपने दादाजी के पुराने घर में रहने आया था। पहली रात… शनिवार। 11:58 बजे… अचानक पूरे गाँव की लाइट चली गई। 12:00… एकदम सन्नाटा। अर्जुन खिड़की से बाहर देख रहा था… तभी उसे लगा कोई उसके घर के सामने खड़ा है। एक लंबा सा काला साया… बिना चेहरे के। अर्जुन ने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला… बाहर कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही वो वापस मुड़ा— दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। और अंदर… दीवार पर… किसी ने अभी-अभी खून से लिखा था— “मत देखो मुझे…” अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा। तभी… ऊपर वाली मंज़िल से आवाज आई— ठक… ठक… ठक… जैसे कोई धीरे-धीरे चल रहा हो। लेकिन घर में तो कोई नहीं था… अर्जुन धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा। हर कदम पर आवाज तेज होती जा रही थी… ठक… ठक… ठक… जैसे कोई उसका इंतज़ार कर रहा हो। जैसे ही वो ऊपर पहुँचा… कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था। अंदर से… कोई फुसफुसा रहा था— “तू आ गया…” अर्जुन ने दरवाज़ा खोला… कमरा खाली था। लेकिन अचानक… उसके पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। बर्फ जैसा ठंडा… अर्जुन धीरे-धीरे पलटा… और जो उसने देखा… उसकी अपनी ही शक्ल… उसके सामने खड़ी थी। लेकिन उसकी आँखें पूरी काली थीं… और वो मुस्कुरा रही थी। “अब तू नहीं… मैं जिऊँगा…” अचानक सब अंधेरा हो गया।
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