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(रात का समय। भीम और उसके साथी एक पुराने वाहन के पास खड़े हैं। तभी भीम को कुछ अजीब आहट सुनाई देती है। वह चौंक कर पीछे मुड़ता है और देखता है कि राजू सड़क पर बेहोश पड़ा है। भीम घबराकर चिल्लाता है "भाई!" और दौड़कर राजू के पास पहुँचता है। वह उसे अपनी गोद में उठाकर हिलाने लगता है।)भाई! राजू, क्या हो गया? हे! भाई!(भीम, राजू के हाथ पर सांप के काटने के दो गहरे निशान देखता है। वह तुरंत समझ जाता है कि राजू के शरीर में जहर फैल रहा है। निन्नागा (सांप)! पेद्दया, मुझे एक जलता कोयला चाहिए! जंगू, धतूरे की जड़ लेकर आ जल्दी!भीम के साथी मदद के लिए भागते हैं। भीम पास के एक हैंडपंप से पानी भरकर राजू के चेहरे पर छिड़कता है और उसे होश में लाने की कोशिश करता है।भाई... राजू, कुछ नहीं होगा तुम्हें(भीम मंदिर की सीढ़ियों पर धतूरे की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालता है और राजू के पास वापस आता है। वह राजू को जड़ी-बूटी पिलाता है। राजू की आँखें बंद होने लगती हैं। भीम अपनी गर्दन से अपना पवित्र रक्षा धागा उतारने लगता है। बेटा, रक्षा मोली क्यों उतार रहे हो? इसके बिना तो तुम खतरे में पड़ सकते हो।भाई को इसकी मुझसे ज्यादा जरूरत है। भाई तो ठीक होगा ना?भीम वह रक्षा कवच राजू के गले में बाँध देता है। वह राजू को एक हाथगाड़ी पर लिटाता है और अपने साथियों से कहता है, "तुम लोग जाओ।" भीम अकेले ही उस गाड़ी को खींचते हुए पूरी ताकत से भागने लगता है।भाई, आँखें खुली रखना। मैं साथ हूँ तुम्हारे। तुम्हें कुछ नहीं होगा भाई। तुम्हें कुछ नहीं होगा।
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