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राहुल पार्क की बेंच पर बैठा था

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2026-04-09

राहुल पार्क की बेंच पर बैठा था। चारों तरफ हल्की धूप फैल रही थी और पेड़ों की पत्तियाँ हवा में धीरे-धीरे हिल रही थीं। उसका हाथ एक पुरानी चिट्ठी पर टिक गया था, जो उसने हाल ही में अपने पुराने किताबों के डब्बे में ढूंढी थी। यह चिट्ठी सिया की लिखी हुई थी—उसकी बचपन की सबसे अच्छी दोस्त, जो अब शहर छोड़कर कहीं दूर चली गई थी। चिट्ठी का कागज़ फिका पड़ चुका था, किनारे थोड़े मुड़े हुए थे, और अक्षर थोड़े धुंधले लग रहे थे, लेकिन हर शब्द में एक अजीब सा प्यार और यादों की मिठास थी। राहुल ने गहरी सांस ली और चिट्ठी खोलकर पढ़ना शुरू किया। पहली लाइन पढ़ते ही उसकी आँखों में चमक थी, लेकिन धीरे-धीरे वह नमी में बदल गई। “राहुल, अगर तुम ये चिट्ठी पढ़ रहे हो, तो शायद मैं अब तुम्हारे पास नहीं हूँ। लेकिन याद रखना, हमारी दोस्ती हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी। कभी-कभी लोग दूर चले जाते हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा पास रहती हैं।” उसने चिट्ठी को अपने सीने से लगाया और मुस्कुराने की कोशिश की। पार्क में बच्चे खेल रहे थे, कुत्ते अपनी दौड़ में मस्त थे, और बगल में बूढ़ा आदमी अपने कबूतरों को खाना दे रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन राहुल के लिए हर चीज़ में सिया की कमी महसूस हो रही थी। उसने सोचा, *कितना अजीब है, कुछ लोग चले जाते हैं, पर उनकी बातें और उनके एहसास हमारे साथ हमेशा रहते हैं।* उसकी यादें उसे स्कूल के दिनों में ले गईं, जब सिया और वह हर सुबह साथ स्कूल जाते, लड़कियों और लड़कों के झगड़े में हँसते, और हर छोटी बात पर घंटों बातें करते।

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Created: 2026-04-09T16:01:44.599Z

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